समाज का आईना पुस्तकें : लाइब्रेरी लंगर एक झलक
समाज का आईना पुस्तकें : लाइब्रेरी लंगर एक झलक
(डॉ पूर्णिमा राय)
पुस्तकों का महत्व अक्षुण्ण है। पुस्तकें समाज का आईना हैं।पुस्तकों में एक कवि, लेखक ,साहित्यकार अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के साथ-साथ समाज को पथ भ्रमित होने से बचाने के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका का निर्वहन भी करता है ।जब मन में भावनाओं का सागर उमड़ता है तो वह शब्दों के रूप में कागज पर अंकित कर दिया जाता है और फिर वह शब्द प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक अर्थ को ध्वनित करते हैं ।गहनता से समझने वाला पाठक तो पुस्तक में छपे शब्दों के अर्थ को आसानी से समझ लेता है पर जो पाठक गहराई से शब्दों के अर्थ को नहीं समझ पाता, वह महज पुस्तक में सहज रस अनुभूति प्राप्त करके ही अपने आप को आनंदित कर लेता है। सफल लेखक का दायित्व इसी में होता है कि उसने उसकी पुस्तक जन-जन को प्रेरित करे, उसमें संकलित किए गए शब्द ,वाक्य ,घटनाएं ,भावनाएं सदैव समाज की प्राचीनता और समसामयिकता को उजागर करे। पुस्तक का आवरण पृष्ठ देखकर कुछ लोग आकर्षित होते हैं, कुछ लोग पुस्तक का नाम पढ़कर पुस्तक को पढ़ने के लिए लालायित हो जाते हैं, कुछ लोग पुस्तक पर अंकित रचनाकार का नाम देखकर चाहते हैं कि एक प्रसिद्ध साहित्यकार है तो हम इसकी रचना को पढ़ें, इसकी पुस्तक का अध्ययन करें । पर ऐसा सोचना कहीं हमें किसी साधारण व्यक्ति विशेष की लिखी हुई पुस्तक को भी पढ़ने से रोक देता है। पुस्तक का चयन करते वक्त हमें अपने मानसिक स्तर ,अपने समय सीमा और अपनी रूचि के अनुसार पुस्तक का चयन करना चाहिए।पुस्तकें हर वर्ग आयु के लिए देश और काल के अनुसार लिखी जाती हैं। बहुत सी पुस्तकें ऐसी होती हैं जो लाइब्रेरी में बंद रह जाती हैं। उन पर धूल मिट्टी जमी रहती हैं। कभी कोई उसको खोल कर देखता है और कभी कोई उसको अनदेखा ही कर जाता है। हम यह सोचते हैं कि आज मैंने यह पुस्तक पढ़ ली इस पुस्तक का मेरे लिए कोई भी अब मूल्य नहीं है ऐसा नहीं होता ।हर पुस्तक अपने आप में महत्वपूर्ण होती हैं चाहे वह किसी भी विषय की हो । अपने अपने मानसिक स्तर आयु के अनुरूप हम अपनी पुस्तक पढ़ने के लिए चयन कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक बेहतरीन आयोजन जो पंजाब में शिक्षा सचिव श्री कृष्ण कुमार जी के दिशा निर्देश से एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ हरपाल बाजक (हिंदी पंजाबी ) के बेहतरीन प्रबंध के अधीन हर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी एवं के देखरेख में एवं पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब टीम के सहयोग से ,समस्त बीएन ओ साहिबान, सभी बीएम साहिबान बखूबी करवाया जा रहा है। इसी उपलक्ष में कल 17 जुलाई को अमृतसर में बड़ी धूमधाम से पुस्तकों के साथ समाज को जोड़ने का आयोजन लाइब्रेरी लंगर इवेंट जिला शिक्षा अधिकारी सतिंदरबीर सिंह के नेतृत्व में, पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब टीम के सहयोग से, सभी विषयों के डीएम साहिबान ,सभी विषयों के बीएम तथा समस्त बीएन ओ,प्रिंसिपल टीम, समस्त स्कूल मुखी, इंचार्ज साहिबान तथा सभी विषयों के शिक्षकों के अमूल्य सहयोग से बाखूबी करवाया गया। मेरे 19 वर्षों के सेवाकाल के दौरान इस तरह का आयोजन इतने बड़े स्तर पर पहली बार देखने को मिला। इस लाइब्रेरी लंगर में 2 साल के बच्चे से लेकर 100 साल के बुजुर्ग ने भी किताबें स्कूलों से प्राप्त करके अपना सहयोग दिया। इतना ही नहीं ,हमारे शिक्षक बॉर्डर पर भी पहुंच गए और सीमा पर तैनात सैनिकों को भी पुस्तकों भेंट कर के एक इतिहास रच दिया। हमारी महिला शिक्षिकाएं किसी से कम नहीं थी उन्होंने भी अपने स्कूल के पास से गुजरती हुई बारात में से घोड़ी पर बैठे दूल्हे और उसके साथ सरबाला बने बच्चे दोनों को ही किताबें भेंट करके यह दिखा दिया कि एक एक पुस्तक भेंट करके भी हम हर किसी को लाइब्रेरी लंगर से जोड़ सकते हैंऔर इस लाइब्रेरी लंगर व्यवस्था में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। आमतौर पर कारों को फूलों से शादी ब्याह के अवसर पर सजाया जाता है पर हमारे शिक्षकों ने कारों पर किताबों को सजा कर समाज को दिखा दिया कि आज किताबें किसी तक पहुंचाना असंभव नहीं है। विद्यालयों के बैंचों पर ,डेस्क के ऊपर सजी हुई पुस्तकें ,श्यामपट्ट पर लिखे हुये पुस्तकों के कथन, कहानियां, दरवाजों पर ,स्कूल की बिल्डिंग के गलियारे में, मीनारों पर ,वृक्षों पर ,स्कूल के हर एक कोने में एक बेहतरीन ढंग से सजाई गई किताबें अपनी कहानी अपनी जुबानी सुना रही थी। अंत में यही कहना चाहूंगी--
पुस्तकों से प्रीत है /पुस्तके ही मीत है
पुस्तकें जल लहर मानिंद /स्वर सजा नवगीत है
डॉ पूर्णिमा राय
शिक्षिका एवं लेखिका,बीएम हिंदी
आलोचना पुरस्कार विजेता ,भाषा विभाग, पंजाब
drpurnima01.dpr@gmail.com

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