ललित छंद.(सार छंद)
ललित छंद.(सार छंद)
(1)
मैया का प्यारा आँचल ये,
छाँव घनी देता है।
खुशी बाँट के जग में सारी,
सब गम हर लेता है।।
मुश्किल की घड़ियों में सबको ,
माँ दिखे सुहानी हैं।।
सुख-वैभव को कुर्बान करें ,
माँ यही कहानी है।।
(2)
पावन बेला वैशाखी में
फसलें पक जाती हैं।
दृश्य मनोरम देख-देख के
चिड़ियाँ मुस्काती हैं।।
जन आनंदित दिखें सभी अब,
चाह हृदय उठती है।
कृषकों की हालत सुधरे बस,
यही दुआ करती है।।
डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।।

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