राधा अष्टमी व्रत का महत्व
राधा अष्टमी व्रत (आलेख)
राधा अष्टमी के व्रत में भक्तगण उपवास रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन राधा रानी के जन्मोत्सव पर सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है, स्वच्छ (अथवा पीले रंग के) वस्त्र धारण किए जाते हैं और घर के मंदिर अथवा पूजा स्थल को साफ किया जाता है। राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित कर उसे पंचामृत से स्नान कराना, फूल, रोली, चंदन, अक्षत, पुष्पमाला, तुलसी दल आदि अर्पित करना परंपरा है। पीले या गुलाबी वस्त्र, आभूषण, इत्र, मोर पंख, बांसुरी और सोलह श्रृंगार की सामग्री राधा रानी को अर्पित की जाती है। घर में माखन-मिश्री, खीर, फल और मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है।
व्रत की विशेषताएँ
व्रती प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं।
पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करके राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं।
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) से मूर्ति का अभिषेक किया जाता है।
सुहागिनें सोलह श्रृंगार की सामग्री व लाल चुनरी राधारानी को पहनाती हैं।
भोग में माखन-मिश्री, खीर, मिठाई आदि रखते हैं।
राधा-कृष्ण मंत्रों (जैसे 'श्री राधा-कृष्णाय नमः' अथवा 'राधे राधे') का 108 बार जाप करते हैं.
अन्य प्रमुख विधियाँ व उपवास
कई लोग दोपहर तक निर्जला या फलाहार का उपवास रखते हैं, कुछ पूर्ण उपवास भी करते हैं।संध्या के समय व्रत कथा का श्रवण या पाठ किया जाता है।व्रत के पारण में फलाहार या प्रसाद ग्रहण किया जाता है।इस दिन कन्याओं को भोजन या खीर खिलाना, जरूरतमंदों को अन्न-धन या वस्त्र दान करना भी शुभ माना जाता है राधा अष्टमी व्रत भक्ति, प्रेम व समर्पण का प्रतीक है और ऐसा माना जाता है कि विधिपूर्वक पूजा व उपवास करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
राधा अष्टमी व्रत के लाभ
इस व्रत से प्रेम, सौभाग्य, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। राधा रानी की कृपा से जीवन में सुख-शांति और धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति गलती से भी यह व्रत करता है, वह अपने कुल समेत भगवत धाम जाने योग्य बनता है।
विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत दांपत्य जीवन में सुख-सौभाग्य और प्रेम बढ़ाने वाला है। कुंवारी कन्याओं को इस व्रत से मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी की पूजा से भगवान श्रीकृष्ण भी प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
इस व्रत को रखना एक लाख निर्जला एकादशी व्रत रखने के समान पुण्यफल देता है।
राधा अष्टमी व्रत की महिमा ऐसी है कि यह समस्त वैष्णवों को उनके भक्ति मार्ग में अत्यंत लाभकारी होता है और जीवन की तमाम मनोकामनाएँ पूरी करता है।
इस प्रकार, राधा अष्टमी का व्रत भक्ति, समृद्धि, दैवीय कृपा और मोक्ष के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है।
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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