धरती के सितारे ---- डॉ.पूर्णिमा राय
1* धरती के सितारे ---- डॉ.पूर्णिमा राय,
कुण्डलिनी छंद----
बच्चे भारत देश के, एक पिता संतान।
रंग लहू का एक है, फैलाएं संज्ञान।।
फैलाएं संज्ञान,सभी मानव हैं सच्चे;
कर लें हम पहचान,कौन भारत के बच्चे।।
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गज़ल /गीतिका ---------
ये' बच्चे तो बहुत भोले बहुत मासूम प्यारे हैं;
उजाला घर में' करते हैं ये' धरती के सितारे हैं।।
ये'जब भी बात करते हैं हँसाते हैं जमाने को ;
विधाता को बहुत प्यारे सभी के ये दुलारें हैं।।
चलें माँ बाप के पदचिह्न वो करते नाम हैं रोशन;
बने आदर्श वो सबके सभी उनसे ही हारे हैं।।
बड़ी गाड़ी बड़ी कोठी की सबको चाह रहती है;
मगर माँ बाप पर किसने ये सारे ख्वाब वारे हैं।।
मैं'तुझको पूजता हूँ माँ ते'री सेवा धरम मेरा;
ये' बातें हैं दिखावे की दिलों में बस अँधेरे हैं।।
बिना माँ-बाप के बच्चे हमेशा दर-ब-दर भटके;
बने हम आसरा उनका वे' हमपे जान वारें हैं।।
दुआ ये " पूर्णिमा " करती हमेशा खुश रहें बच्चे;
इन्हीं के साथ जीवन के सभी सुँदर नजारे हैं।।
2*अनिरुद्ध (कविता) डॉ.पूर्णिमा राय
सीधा-सादा शांत अनिरुद्ध;
हर पल हँसता रहता है।।
अपनी मीठी बोली से वे
सबके दुख को हरता है।।
रोज सवेरे जल्दी उठकर;
ब्रश मंजन सब करता है।।
हाथ साफ कर खाना खाता;
स्वच्छ देह को रखता है।।
सूरज चंदा प्यारे लगते;
उनके जैसे सजता है।।
गल्ती करके सॉरी बोले;
मात-पिता से डरता है।।
मैडम उसको अच्छी लगती;
सारा होमवर्क करता है।।
अभी दूसरी कक्षा का ही ;
सपनों में रँग भरता है।।
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